सोमवार, 19 अक्तूबर 2009

वो कब मिलेगी

आज अचानक ही
किसी हसीना से आँखें मिल गई
मिली ऐसी कि
कुछ देर के लिए ठहर गई
आँखें न जाने क्या बतियाई
कि कुछ देर में ही अपनापन हो गया

वो चले गए
हम वहीं देखते रह गए
वो वापस हमारे पास आए
कुछ पल ठहरे
हम फ़िर भी कुछ न बोल पाए
और चले आए

जब उनका अपनापन याद आता है
तो रोना आता है
न जाने वो कहाँ चली गई
हमें गम प्यारा सा दे गई
कोई हमारा होना चाहता था
फ़िर भी न हो पाया .

भविष्य भारत का

लो !ये पड़ा है बिखरा
भविष्य भारत का
कच्ची बस्ती
व्यस्त सड़कों के
किनारों ठहरे पर
रहा है मूंगफली,अख़बार बेच
थामे हैं कटोरा करों में मलिन शेष

लो !ये तल रहा हैं भुजिये
भविष्य भारत का
गर्मागर्म झर्र से
हाथों सुकुमार से
ला रहा हैं, परोस नाश्ता,चाय ऊपर मेज
मरा रहा है पौचे सेठ ,शीघ्र भेज

लो !ये तले आसमान गया लुढक
भविष्य भारत का
किंचित भूखा,किंचित नंगा
बनी हैं बिस्तर सड़कें
क्या जाएगा पढने उठ तड्के?

लो !ये नाक-भौंह ली चढा
वर्ग संभ्रात ने
देख भविष्य भारत का
लो !आज हो गया उपेक्षित
भविष्य भारत का .

सोमवार, 12 अक्तूबर 2009

संभावना सफलता की

संपर्क पारस में जब आया लोहा
बन गया सोना
कुंदन हुआ तपकर आग में
माना कि पारस संपर्क में
लोहा बन गया सोना

पर गुण यह लोहे में होता है
कि बन जाए सोना,
बनना नहीं हीरे-मोती
कंकर-पत्थर के भाग में
लगाओ कोई भी जंतर-मंतर
या रखो पारस संपर्क में .